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Bihar Police Exam Cheating Case: सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा खुलासा, ब्लूटूथ और वॉकी-टॉकी से नकल कराने वाले नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई

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बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। सहरसा और दरभंगा में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर ब्लूटूथ, ईयरबड, मोबाइल और वॉकी-टॉकी बरामद किए हैं।

सहरसा/आलम की खबर:बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान नकल कराने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। परीक्षा की शुचिता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे एक नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ लोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से परीक्षा केंद्र के अंदर बैठे अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। सहरसा और दरभंगा में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

मामले की शुरुआत पटना के एक परीक्षा केंद्र से हुई, जहां परीक्षा के दौरान एक परीक्षार्थी के पास से ब्लूटूथ डिवाइस बरामद किया गया। जांच में पता चला कि वह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बाहर मौजूद किसी व्यक्ति से संपर्क में था और उसे उत्तर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही थी। पूछताछ के दौरान परीक्षार्थी ने पुलिस को बताया कि परीक्षा में नकल कराने की व्यवस्था सहरसा से की गई थी। इसके बाद पुलिस ने सहरसा में कार्रवाई शुरू की और धीरे-धीरे इस नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाई।

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के लोग अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का भरोसा देकर अपने संपर्क में लेते थे। आरोप है कि परीक्षा में सफल कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे लेने की तैयारी थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

सहरसा में पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद हुए हैं। जांच टीम को अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, एडमिट कार्ड, ब्लैंक चेक और कई मोबाइल फोन मिले हैं। पुलिस ने जब मोबाइल की जांच शुरू की तो उसमें परीक्षा से संबंधित बातचीत, व्हाट्सएप चैट और संदिग्ध संदेश मिले। इन डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई तेज कर दी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी अभ्यर्थियों से पहले ही दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात ले लेते थे। इसके बाद परीक्षा के समय इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मदद पहुंचाने की योजना बनाई जाती थी। मोबाइल चैट के आधार पर पुलिस ने कई अन्य संदिग्धों की पहचान की और अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर गिरफ्तारियां कीं।

जांच के दौरान पुलिस ने सहरसा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की। इसके बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य जिलों के लोगों तक भी जांच पहुंची। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का संपर्क कई जिलों तक फैला हुआ हो सकता है और आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

वहीं, दरभंगा में भी सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान नकल कराने का मामला सामने आया। यहां परीक्षा केंद्र पर तैनात वीक्षकों को एक महिला परीक्षार्थी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद वह बार-बार पानी पीने और शौचालय जाने की अनुमति मांग रही थी। शक होने पर उसकी दोबारा जांच की गई, जिसमें बालों के अंदर छिपाकर रखा गया इलेक्ट्रॉनिक ईयरबड बरामद हुआ।

जांच में उसके पास से ब्लूटूथ से जुड़ा उपकरण भी मिला। पूछताछ में महिला परीक्षार्थी ने बताया कि परीक्षा में मदद पहुंचाने के लिए केंद्र के बाहर मौजूद कुछ लोग इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में परीक्षा केंद्र के बाहर से कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से वॉकी-टॉकी, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्न पत्र या प्रश्नों की जानकारी बाहर तक कैसे पहुंचाई जा रही थी और इस पूरी व्यवस्था में कितने लोग शामिल थे।

दरभंगा के एक अन्य परीक्षा केंद्र पर भी ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करने की कोशिश का मामला सामने आया। वहां से भी कुछ परीक्षार्थियों और मदद पहुंचाने वाले लोगों को पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, सभी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

इस पूरे मामले ने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस की सक्रियता के कारण परीक्षा के दौरान ही इस नेटवर्क का खुलासा हो गया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया था और क्या इससे पहले भी किसी परीक्षा में इस तरह की कोशिश की गई थी।

अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। मोबाइल और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर गिरोह के मुख्य संचालकों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में लाखों अभ्यर्थी कड़ी मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में नकल कराने वाले गिरोहों पर कार्रवाई जरूरी है ताकि मेहनती उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।

सिपाही भर्ती परीक्षा में नकल कराने की कोशिश का खुलासा यह बताता है कि परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए लगातार सतर्कता जरूरी है। आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल कर कुछ लोग मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं।

सहरसा और दरभंगा में हुई कार्रवाई से यह साफ है कि पुलिस की निगरानी और जांच प्रक्रिया मजबूत होने पर ऐसे गिरोहों तक पहुंचा जा सकता है। अब जरूरत है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच हो और इसमें शामिल हर व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाए।

निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था ही योग्य उम्मीदवारों को आगे बढ़ने का अवसर देती है। इसलिए भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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